पूर्व जजों के खिलाफ जारी होगा गिरफ्तारी वारंट?

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गाजियाबाद। नजारत पीएफ घोटाले में आरोपी छह सेवानिवृत्त जजों की कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट देने संबंधी अर्जी सोमवार को सीबीआइ की विशेष कोर्ट ने खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि जब पूर्व जज लखनऊ से इलाहाबाद और वहां से दिल्ली आ-जा सकते हैं तो कोर्ट में पेश क्यों नहीं हो सकते। सभी पूर्व जजों को अदालत को आश्वस्त करना होगा कि वे अदालत में अगली तारीख को व्यक्तिगत रूप से पेश होंगे। यदि पेश नहीं हुए तो उनकी गिरफ्तारी के वारंट जारी हो सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई 18 फरवरी को होगी।

ज्ञात है कि नजारत पीएफ घोटाले के संबंध में वर्ष 2008 में सीबीआइ की तत्कालीन विशेष न्यायाधीश रमा जैन के निर्देश पर कविनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इसमें मुख्य नाजिर आशुतोष अस्थाना समेत अस्सी से अधिक लोग नामजद थे। अस्थाना की संदिग्ध परिस्थितियों में जिला कारागार में मौत हो गई। बाद में यह मामला सीबीआइ को सौंपा गया। मामले में सीबीआइ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।

गौरतलब है कि यह घोटाला वर्ष 2001 से 2007 के बीच करीब सात करोड़ का था। मामले में छह सेवानिवृत्त जजों आरपी यादव, आरपी मिश्रा, आरएन मिश्रा, आरएस चौबे, अजय कुमार तथा अरुण कुमार समेत 20 लोगों को 21 दिसंबर 10 को समन जारी किया गया था। बीते 13 जनवरी को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने में छूट देने को दाखिल अर्जी निरस्त हो गई थी।

सोमवार को घोटाले से संबंधित जेल में बंद सभी 27 अभियुक्तों को सीबीआइ की विशेष अदालत में पेश किया गया। वहीं, सेवानिवृत्त जजों ने अपने-अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से आरोप तय होने की स्थिति तक व्यक्तिगत रूप से हाजिरी माफी की अर्जी दाखिल की। तर्क था कि उनकी उम्र ज्यादा हो चुकी है और वे बीमार रहते हैं। इस स्थिति में उनका अदालत में पेश होना मुश्किल है। साथ ही सेवानिवृत्त जज आरपी यादव की ओर से एक अर्जी दाखिल की गई, जिसमें उन्होंने कुछ अन्य तथ्यों पर जांच कराने की गुजारिश की।

अधिवक्ता महेंद्र मुद्गल, नंदित श्रीवास्तव व अजय कुमार ने अपने- अपने मुवक्किलों की बीमारी से संबंधित कागजात पेश करते हुए अदालत में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट देने का अनुरोध किया। इस पर सीबीआइ के अधिवक्ता विशेष लोक अभियोजक वीके शर्मा, एस इस्लाम तथा बीके सिंह ने कहा कि पूर्व जजों की बातों पर सीबीआइ को कोई संदेह नहीं है। लेकिन, जिस तरह पूर्व जज मुकदमे की पैरवी के लिए लखनऊ से इलाहाबाद तक जा रहे हैं और इलाज के लिए दिल्ली तक चले जा रहे हैं तो गाजियाबाद कोर्ट में पेश क्यों नहीं हो सकते? इस मामले में 27 लोग पिछले तीन वर्षो से जेल में बंद हैं। पूर्व जजों के पेश नहीं होने से मामले की सुनवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है, इसलिए जजों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं होने की छूट न दी जाए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने करीब चार बजे पूर्व जजों को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने में छूट दिए जाने की अर्जी निरस्त कर दी।

Posted on Feb 1st, 2011
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Posted in :  ब्रेकिंग न्यूज     
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