भारत में पहले इस्लामिक बैंक

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तिरुअनंतपुरम।। धर्मनिरपेक्ष भारत में पहले इस्लामिक बैंक का रास्ता करीब-करीब साफ हो गया है। केरल हाई कोर्ट ने शरीय कानून के मुताबिक चलने वाले इस्लामिक बैंक को मंजूरी देने वाले राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाला याचिका को खारिज कर दिया है।

जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी ने इसे चुनौती देते हुए कहा था कि राज्य की ओर से एक धर्म विशेष के आधार पर चलने वाला बैंक खोले जाने से संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन होगा। चीफ जस्टिस जे. चलामेश्वर और जस्टिस पी.आर. मेनन की डिवीजन बेंच ने स्वामी के तर्कों को नहीं माना। हाई कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी ने कहा कि यह फैसले की पूरी कॉपी पढ़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट में जाने पर फैसला करेंगे।

केरल सरकार ने रजिस्टर्ड इकाई अल-बराका फाइनैंशल सर्विस के तहत दिसंबर 2009 में इस्लामिक बैंक खोलने की योजना बनाई थी। बैंक के कारोबार में शरीय के सिद्धांतों का पालन करवाने के लिएइ इस्लामिक विद्वानों की एक संस्था भी बनाई गई थी। लेकिन जनवरी 2010 में हाई कोर्ट ने इस पर स्टे लगा दिया था। हाई कोर्ट ने रिजर्व बैंक, वित्त मंत्रालय, केरल राज्य औद्योगिक विकास निगम को नोटिस भेजा था। केरल राज्य औद्योगिक विकास निगम के पास अल-बराका का 11 % शेयर है।

रिजर्व बैंक ने अपने जवाब में कहा था कि वर्तमान कानून इस तरह के बैंक की इजाजत नहीं देता।

Posted on Feb 3rd, 2011
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Posted in :  बड़ी खबर     
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