झालानाथ खनल बने नेपाल के प्रधानमंत्री

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काठमाडू। नेपाल के जाने माने कम्युनिस्ट नेता झालानाथ खनल ने रविवार को नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली लेकिन सत्ता में साझेदारी को लेकर उनकी पार्टी का अपने महत्वपूर्ण सहयोगी माओवादियों के साथ करार नहीं हो पाने की वजह से मंत्रिमंडल का गठन नहीं हो पाया।

राष्ट्रपति राम बरन यादव ने उपराष्ट्रपति प्रेमानंद झा, पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल, माओवादी प्रमुख प्रचंड, नेपाली काग्रेस के अध्यक्ष सुशील कोईराला, संसद के अध्यक्ष सुभाष चंद्र नेम्बाग समेत शीर्ष नेताओं की उपस्थिति में एक समारोह में खनल को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई।

साठ वर्षीय खनल ने कहा, ‘मैं अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए राष्ट्र और उसकी जनता के प्रति समर्पित और ईमानदार बना रहूंगा।’ सूत्रों के अनुसार पिछले सात महीने से राजनीतिक नेतृत्व की कमी दूर हो गई है लेकिन मंत्रिमंडल का गठन स्थगित कर दिया गया है क्योंकि सीपीएन-यूएमएल अपने मुख्य समर्थक यूसीपीएन माओवादी के साथ सत्ता की साझेदारी में विफल रही है। बताया जाता है कि माओवादी सौदेबाजी चाहते हैं।

गठबंधन के घटक दलों में महत्वपूर्ण विभागों को लेकर मतभेद के कारण महत्वपूर्ण बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल का आज गठन नहीं हो सका। ऐसी संभावना है कि खनल कल एक लघु मंत्रिमंडल बनाएंगे।

बृहस्पतिवार को संसद में मतदान में माओवादियों का समर्थन बहुत महत्वपूर्ण रहा था और वे संभवत: मंत्रिमंडल में समानुपातिक प्रतिनिधित्व माग रहे हैं।

देश की अंतरिम संसद की तरह कार्य करने वाली संविधान सभा में यूसीपीएन माओवादी की सर्वाधिक 238 सीटें हैं जबकि सीपीएन यूएमएल की महज 108 सीटें ही हैं।

सीपीएन यूएमएल के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पूर्व विद्रोही गृह समेत महत्वपूर्ण विभाग माग रहे हैं जिसे खनल ने अस्वीकार कर दिया जिससे मंत्रिमंडल गठन में विलंब हो रहा है। संविधान सभा में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी नेपाली काग्रेस ने विपक्ष में बैठने का निर्णय लिया है।

सूत्रों के अनुसार सीपीएन यूएमएल के कुछ हिस्से में तथा वर्ष 2009 से इस दल की अगुवाई वाली सरकार का समर्थन करने वाले दल नेपाल काग्रेस में संसद में मतदान के दौरान माओवादियों के साथ गुप्त समझौते को लेकर नाराजगी बढ़ रही है। अंतिम क्षण में माओवादियों ने संविधान सभा की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी सीपीएन यूएमएल उम्मीदवार का समर्थन किया था।

खनल के सामने चुनौतियों का पहाड़

काठमांडू। नेपाल के नव नियुक्त प्रधानमंत्री झालानाथ खनल के सामने कई बड़ी चुनौतिया हैं। सबसे बड़ी चुनौती थमी हुई शाति प्रक्रिया को शुरू कराना और युवाओं को ध्यान में रखते हुए एक नए संविधान का मसौदा तैयार करना है।

कम्युनिस्ट नेता खनल सात महीनों के राजनीतिक गतिरोध के बाद प्रधानमंत्री नियुक्त हुए हैं। फिलहाल सबसे पहले उन्हें अपने मंत्रिमंडल का गठन करना है। इसके साथ देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी नेपानी काग्रेस को साथ लेकर चलना भी उनके लिए आसान नहीं रहेगा।

खनल विज्ञान के शिक्षक रह चुके हैं और वह आजीवन वामपंथ की धारा को मजबूत करने और नेपाल को संपूर्ण लोकतंत्र की ओर ले जाने का प्रयास करते रहे। अपने इन प्रयासों की वजह से ही उन्हें कई वर्षों तक भूमिगत रहना पड़ा। 61 साल के खनल ने हमेशा ही माओवादियों को साथ लेकर चलने की पैरोकारी की।

खनल पहले ही कह चुके हैं, ‘नई सरकार में माओवादियों की सार्थक साझेदारी शाति को आगे ले जाने के लिए जरूरी है। उन्हें साथ लाने वाले नेतृत्व को हमें स्वीकार करना चाहिए।’

खनल नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी [एकीकृत मा‌र्क्सवादी लेनिनवादी] के संस्थापक सदस्य हैं। इस पार्टी का ग्रामीण नेपाल में मजबूत पैठ है। पहले की दो सरकारों में वह मंत्री रह चुके हैं और वर्ष 2009 में वह कम्युनिस्ट पार्टी के अध्यक्ष बने।

विशेषज्ञों का मानना है कि खनल की छवि एक साफ-सुथरी है और वह सिद्धातों की राजनीति में विश्वास करते हैं। एक जानकार ने कहा, ‘वह एक स्वतंत्र विचारक हैं।’ खनल 1990 की सरकार में कृषि मंत्री थे और वर्ष 1997 की गठबंधन सरकार में सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री बने थे। वह एक धुर वामपंथी नेता के रूप में जाने जाते हैं।

Posted on Feb 6th, 2011
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Posted in :  ब्रेकिंग न्यूज, विदेश     
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