डच टेलीकॉम के पास देवास मल्टीमीडिया के 17% शेयर

Font Size : अ- | अ+ comment-imageComment print-imagePrint

देवास मल्टीमीडिया बंगलुरू में 2004 में स्थापित की गई थी। इसके अध्यक्ष डॉ. एम.जी. चंद्रशेखर हैं जो कि इसरो के पूर्व वैज्ञानिक सचिव रह चुके हैं। इससे पहले वे एक सैटेलाइट रेडियो कंपनी वर्ल्ड स्पेस के भी मैनेजिंग डायरेक्टर भी रह चुके हैं। यह कंपनी भारत में पिछले साल बंद कर दी गई थी।

2008 में डॉच्चे टेलीकॉम ने देवास में 17 प्रतिशत की हिस्सेदारी के लिए 75 मिलियन डॉलर का निवेश किया। अंतरराष्ट्रीय निवेशकों में कोलंबिया कैपीटल और टेलीकॉम वेन्चर्स ने भी पैसा लगाया। देवास के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में नासकॉम के पूर्व प्रेसिडेंट किरन कारनिक, वेरिज़ोन कंपनी के पूर्व उपाध्यक्ष लैरी बाबियो और एक्स एम सिरियस सैटेलाइट के पूर्व चेयरमैन गैरी पारसन्स शामिल हैं।

क्या है प्लान
देवास अपनी सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाएं भारत भर में विभिन्न प्लेटफॉर्म पर देता है जिसमें मोबइल कंपनियां भी शामिल हैं। देवास का दावा है कि उनके पास अपना पोर्टेबल डिवाइस है जो एक वाई-फाई राउटर की तरह काम करता है। कंपनी भारतीय रेलवे के साथ भी कुछ सेवाओं के लिए बातचीत कर रही है, जैसे कि रियल-टाइम स्पॉटिंग और भिडंत बचाव के लिए सेवाएं। कंपनी का दावा है कि इन सेवाओं का सफलतापूर्वक परीक्षण 2009 और 2010 में किया जा चुका है।

कैसे हुई थी डील
28 जनवरी 2005 को देवास मल्टीमीडिया और इसरो की कमर्शियल इकाई, एंट्रिक्स के साथ हुए एक समझौते के अंतर्गत एंट्रिक्स को देवास एस बैंड ट्रांसपोंडर कैपेसिटी को लीज़ पर देगा जिसका इस्तेमाल जी सैट-6 और जी-सैट-6ए के लिए किया जाना था। इस समझौते के अंतर्गत ट्रांसपोंडर्स के अलावा 2500 मेगा हर्टज के स्पेक्ट्रम बैंड में से 70 मेगा हर्टज बैंड का इस्तेमाल देवास कर सकता है। देवास मल्टीमीडिया सेटेलाइट और टेरेस्ट्रियल नेटवर्क द्वारा एक ब्रॉडबैंड सेवा लांच करने की योजना भी बना रहा है।

क्या था समझौता

समझौते के अनुसार देवास मल्टीमीडिया प्री-लांच कैपेसिटी रिज़र्वेशन के लिए 40 मिलियन डॉलर और सैटेलाइट कैपेसिटी की लीज़ के लिए 250 मिलियन डॉलर की रकम देगा। देवास के मल्टीमीडिया बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में इसरो/ एंट्रिक्स का एक प्रतिनिधि शामिल है। सेवाएं चालू हो जाने के बाद दोनों ही कंपनियां होने वाली कमाई को शेयर करेंगे। एक बार सेवाएं शुरू हो जाने के बाद कंपनी 500 से 750 मिलियन डॉलर का और निवेश करने का विचार बना रही है।

कब लांच होंगी ये सेवाएं

भारत से दो नए सैटेलाइट 2010 में लांच किए जाने थे पर इसमें देरी हो गई। अब इसरो जीसैट-6 को एरिएनस्पेस नाम की एक यूरोपियन कंपनी द्वारा लांच करवाने की योजना बना रही है क्योंकि समझौते के अनुसार देरी हो जाने पर देवास मल्टीमीडिया को दंड दिए जाने का प्रावधान है। देवास का कहना है कि वो सैटेलाइट के लग जाने पर लांच करने के लिए बिलकुल तैयार हैं। क्या देवास के पास ज़रूरी अनुमति है?

देवास के पास इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर लाइसेंस है। फॉरेन इंवेस्टमेंट प्रोमोशन बोर्ड द्वारा 74 प्रतिशत विदेशी निवेश की अनुमति देवास के पास है। डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम द्वारा ट्रायल स्पेक्ट्रम और फुल लाइसेंस का आवेदन करने के लिए अनुमति भी है। पर देवास को सैटेलाइट आधारित सेवाओं के लिए ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्यूनिकेशन बाई सैटेलाइट का लाइसेंस लेना पड़ सकता है। साथ ही यह भी साफ नहीं है कि देवास के पास बिना अतिरिक्त पैसे दिए टेरेस्ट्रियल स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल करने की अनुमति है या नहीं।

Posted on Feb 7th, 2011
SocialTwist Tell-a-Friend

Leave a comment

Type Comments in Indian languages (Press Ctrl+g to toggle between English and Hindi OR just Click on the letter)


विदेश

राज्य

महिला

अपराध

ब्यूटी