गुटका के प्लास्टिक पाउच पर प्रतिबंध

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पर्यावरण और वन मंत्रालय ने सोमवार को एक बड़े फैसले के तहत गुटका, तंबाकू और पान मसाले को भरने, पैक करने तथा पाउच में बेचने के लिए प्लास्टिक के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया।

मंत्रालय के इस फैसले से पहले सुप्रीम कोर्ट ने बीते दिसंबर में कहा था कि मार्च 2011 से गुटका, पान मसाला तथा अन्य तंबाकू उत्पादों की प्लास्टिक पाउचों में बिक्री पूरी तरह से रोक दी जाए।

इसके बाद दो फरवरी को शीर्ष अदालत ने प्लास्टिक के इस्तेमाल को नियमन के दायरे में लाने के मकसद से कानून को अमल में लाने के लिए केंद्र को और समय देने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने केंद्र से कहा कि वह नए नियमों को दो दिन के अंदर अधिसूचित करे।

इसके मद्देनजर पर्यावरण और वन मंत्रालय ने पुनर्चक्रित प्लास्टिक निर्माण और उपयोग नियम 1999 को निष्प्रभावी करते हुए आज प्लास्टिक प्रबंधन और रखरखाव नियम 2011 को अधिसूचित कर दिया।

नई अधिसूचना के तहत गुटका, तंबाकू और पान मसाला को पाउच में भरने, पैक करने तथा बेचने के लिए प्लास्टिक के इस्तेमाल को प्रतिबंधित किया गया है। अब खाद्य पदार्थो की पैकेजिंग के लिए भी एक बार इस्तेमाल हो चुके प्लास्टिक या कंपोस्टेबल प्लास्टिक के दोबारा उपयोग की इजाजत नहीं दी जाएगी।

मंत्रालय ने साफ तौर पर यह भी कहा है कि ‘उपभोक्ताओं को कोई भी थैली नि:शुल्क मुहैया नहीं कराई जाए और इसके लिए नगरीय निकाय न्यूनतम राशि तय करे। पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने एक वक्तव्य जारी करते हुए स्वीकार किया कि प्लास्टिक पर पूरी तरह से प्रतिबंध फिलहाल संभव नहीं है।

रमेश ने कहा कि देश भर में प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाना अव्यवहार्य और अवाछनीय है। नए नियम कहते हैं कि सामान भरने के लिए प्रयुक्त होने वाली थैलियों के इस्तेमाल को भारतीय मानक ब्यूरो के मानदंडों के अनुरूप ही इजाजत दी जाएगी।

पर्यावरण मंत्रालय ने कहा है कि प्लास्टिक की थैलिया सफेद या सिर्फ उन्हीं रंगों वाली होगी जो बीआईएस के मानकों में निर्दिष्ट हैं। मंत्रालय की वर्ष 1999 की अधिसूचना के तहत प्लास्टिक की थैलियों की मोटाई कम से कम 20 माइक्रोन होना जरूरी था। नई अधिसूचना के अंतर्गत इसे बढ़ाकर 40 माइका्रेन कर दिया गया है।

नए नियमों में मुख्य तौर पर यह प्रावधान किया गया है कि कचरा बीनने वालों की भूमिका को अहमियत दी जाए। नगरीय निकाय के प्रशासनों से कहा गया है कि वे कचरा बीनने वालों सहित अपशिष्ट प्रबंधन में लगे समूहों और एजेंसियों के साथ सक्रियता के साथ काम करें।

इस बारे में रमेश ने कहा कि वास्तविक चुनौती शहरों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की प्रणाली में सुधार लाने की है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के निजीकरण और मशीनीकरण के साथ ही हमें असंगठित क्षेत्र में शामिल लाखों लोगों की जरूरतो और चिंताओं के प्रति भी संवेदनशील होना होगा।

नई अधिसूचना के मुताबिक, नगरीय निकाय के प्रशासन को निर्माताओं को उनकी ‘विस्तारित जिम्मेदारी’ के तहत प्लास्टिक कचरे के एकत्रीकरण केंद्र बनाने के निर्देश देने का अधिकार होगा।

Posted on Feb 7th, 2011
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Posted in :  बड़ी खबर     
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