सरकार के पास न्यायपालिका का लिये पैसा नहीं ?

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सुप्रीमकोर्ट ने आज फिर सरकार पर हमला बोलते हुए कहा की सरकार नहीं चाहती की देश की न्यायपालिका मजबूत हो .

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई भी सरकार नहीं चाहती कि जुडिशरी मजबूत बने। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार द्वारा जुडिशरी को दिए जाने वाले कम बजट पर नाराजगी जाहिर की। पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि अमर सिंह टैपिंग मामले में चार्ज फ्रेम होने में इतना वक्त क्यों लगा ? सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चीफ मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट विनोद यादव की अदालत के रेकॉर्ड पेश किए गए। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत में केस के लंबित होने को गंभीरता से लिया और उक्त टिप्पणी की।

जस्टिस जी . एस . सिंघवी और जस्टिस ए . के . गांगुली ने कहा कि सरकार कुल बजट का एक फीसदी भी जुडिशरी के लिए नहीं देती इस कारण वह इन्फ्रास्ट्रक्चर की समस्या से जूझ रही है। साथ ही , मैन पावर की भी कमी है। इससे पहले सीएमएम विनोद यादव की अदालत के रेकॉर्ड सुप्रीम कोर्ट में पेश किए गए। सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि सीएमएम की अदालत में 1500 केस पेंडिंग है। लंबित मामलों की संख्या को देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि सीएमएम करीब 1500 मामले निपटा रहे हैं और देरी तारीखें लेने के कारण हुई।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक हमारे पास पर्याप्त संख्या में कोर्ट नहीं होंगे , तब तक इस तरह की स्थिति बनी रहेगी। चार्ज पर बहस होने में 4 साल लग गए और मामला खत्म होने में 4 साल लग जाएंगे , जबकि यह 3 महीने में खत्म होना चाहिए। इस तरह की तारीखें लगना पूरे सिस्टम को कैंसर की बीमारी लगा रहा है।

Posted on Feb 12th, 2011
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