यदुरप्पा को मिली कोर्ट से राहत

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कर्नाटक उच्च न्यायालय ने दलबदल कानून के तहत अयोग्य ठहराए गए पांच निर्दलीय  विधायकों की अर्जी सोमवार को खारिज कर विधानसभा अध्यक्ष केजी बोपैया के फैसले  को बरकरार रखा।

अदालत का यह फैसला मुख्यमंत्री बीएस येद्दयुरप्पा के लिए भारी राहत देने वाला है,  क्योंकि इन निर्दलीय विधायकों के बागी तेवरों के चलते ही येद्दयुरप्पा सरकार अल्पमत में आ  गई थी। इन विधायकों में चार येद्दयुरप्पा सरकार में मंत्री थे।

न्यायमूर्ति मोहन शांतानगोदर, न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति एएस  बोपन्ना की पीठ ने 190 पृष्ठ के अपने फैसले में कहा कि 10 अक्तूबर का आदेश संविधान के  प्रावधानों का उल्लंघन नहीं है और न ही इसमें कोई दुराग्रह या अनियमितता है। पीठ ने एक  फरवरी को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।  उल्लेखनीय है कि पिछले साल 11 अक्टूबर को सरकार को विधानसभा में विश्वासमत प्राप्त  करना था, लेकिन इससे पहले ही 16 विधायकों जिनमें 11 भाजपा और पांच निर्दलीय थे, ने  बगावत कर येद्दयुरप्पा के सामने राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया।

निर्दलीय विधायकों गुलिहट्टी शेखर, डी. सुधाकर, पीएम नरेंद्रस्वामी, वेंकटारमनप्पा और शिवराज टंगाडागी ने राज्यपाल हंसराज भारद्वाज को पत्र लिखकर कहा था कि उनका मुख्यमंत्री पर विश्र्वास नहीं रहा। विधानसभा अध्यक्ष ने विश्वासमत से ठीक एक दिन पहले बागी विधायकों को दलबदल कानून के तहत अयोग्य करार दे दिया था। इन विधायकों ने विधानसभाध्यक्ष के इसी फैसले को अदालत में चुनौती दी थी। पीठ ने कहा कि इन विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों से पांच मतदाताओं द्वारा दायर की गई शिकायत विचारणीय है।

अदालत ने याचिकाकर्ताओं की उस दलील को खारिज कर दिया कि उनका कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है। पीठ के अनुसार इस बात में कोई विवाद नहीं है कि याचिकाकर्ताओं ने मुख्य सचेतक की ओर से दिए गए निर्देश के अनुसार काम किया। आदेश में कहा, अगर याचिकाकर्ता वाकई भाजपा विधायक दल के सदस्य नहीं होते तो उस पार्टी के मुख्य सचेतक की ओर से उन्हें व्हिप नहीं मिलता।

सर्वसम्मति से दिए गए आदेश में पीठ ने कहा, इन सभी रिट याचिकाओं में कोई दम नहीं है और इन्हें खारिज किया जाता है। पीठ ने कहा, हमें याचिकाकर्ताओं की तरफ से दी गई दलीलों में कोई दम नजर नहीं आता। मामले की सुनवाई के दौरान अयोग्य ठहराए गए इन विधायकों के वकीलों ने दलील दी कि वे कभी भाजपा में शामिल नहीं हुए जबकि प्रतिद्वंद्वी याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि अपने आचरण से इन विधायकों ने निर्दलीय प्रकृति खो दी थी और बल्कि वे पार्टी में शामिल हो गए थे।

Posted on Feb 15th, 2011
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Posted in :  ब्रेकिंग न्यूज     
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