अश्लीलता को क्यों ना बंद कर दिया जाए

Font Size : अ- | अ+ comment-imageComment print-imagePrint

टेलीविजन रियलटी शो “इमोशनल अत्याचार” सूचना और प्रसारण मंत्रालय व गृह  मंत्रालय समेत कई लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन गया हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने  दोनों मंत्रालयों समेत यूटीवी के चेयरमैन और शो की टीम को कार्यक्रम में  अश्लीलता परोसे जाने और भारतीय कानूनों उल्लंघन के लिए नोटिस  जारी किया है।

बुधवार को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और संजीव खन्ना की बैंच ने एक एनजीओ की याचिका पर संबंधित पक्षों से चार हफ्तों में जवाब मांगा है। इन्हें सात अप्रैल तक मामले पर अपना जवाब देने का वक्त दिया है।

याचिकाकर्ता संजय तिवारी उजाला ने बताया कि उन्होंने यूटीवी बिंदास के कार्यक्रम इमोशनल अत्याचार में भारतीय कानूनों की धज्जियां उडते देख इसके प्रसारण को रूकवाने के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और गृह मंत्रालय को चिट्ठियां लिखी, लेकिन दोनों ही मंत्रालयों ने इस पर गौर नहीं किया।

मामले की गंभीरता को और भारतीय संस्कृति और समाज को हो रहे नुकसान और हो सकने वाले संभावित नुकसान को देखते हुए उन्होंने इसके संबंध में जनहित याचिका दायर करना ही बेहतर समझा। करीब 25 दिन पहले उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायलय में इस संबंध में जनहित याचिका दायर की।

जिसपर सुनवाई करते हुए दिल्ली उच्च न्यायलय ने यूटीवी चैनल को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि क्यों ना चैनल का प्रसारण बंद कर दिया जाये। इस संबंध में उच्च न्यायलय ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और गृह मंत्रालय को भी नोटिस जारी किया है।

याचिकाकर्ता के अनुसार इमोशनल अत्याचार कार्यक्रम में ऑर्गेनाइज्ड क्राइम (संगठित अपराध) दिखाया जाता है, जिसमें प्लान के तहत किसी प्रेमी-प्रेमिका के निजी रिश्तों को सार्वजनिक किया जाता है और उन्हें लड़ने के लिए उकसाया जाता है।

गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी होती है कि किसी भी तरह के अपराध को रोका जाये, लेकिन इसके विपरीत इस कार्यक्रम में मारपीट की जाती है जोकि एक अपराध है। लेकिन गृह मंत्रालय इसेक प्रति उदासीन बना रहा, इसलिए उसकी भी इसके प्रति जिम्मेदारी बनती है।

यूटीवी एक विदेशी कंपनी का चैनल है जो एक सोची समझी रणनीति के तहत भारतीय संस्कृति को दूषित करने के लिए ऐसे कार्यक्रम प्रसारित कर रहा है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का इस तरह के कार्यक्रम को प्रसारित होने देना भी घोर लापरवाही है इसलिए इस मंत्रालय की भी जवाबदेही बनती है।

Posted on Feb 24th, 2011
SocialTwist Tell-a-Friend
Posted in :  समाज और हम     
Subscribe by Email

Leave a comment

Type Comments in Indian languages (Press Ctrl+g to toggle between English and Hindi OR just Click on the letter)


विदेश

राज्य

महिला

अपराध

ब्यूटी