चीन और पाकिस्‍तान का मिलना भारत के लिये खतरा..!

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आने वाले दिनों में चीन और पाकिस्‍तान मिल कर भारत के लिए  और ज्‍यादा बड़ा खतरा बन सकते हैं। दोनों देशों ने हर क्षेत्र में  दोस्‍ती और पक्‍की करने के लिए खास योजना बनाई है।  पाकिस्‍तान ने चीन से दोस्‍ती बढ़ाने के लिए वर्ष 2011  को ‘मित्रता वर्ष’ घोषित किया है। अगले महीने दोनों देश  साझा सैन्‍य अभ्‍यास भी करने वाले हैं।

पाकिस्‍तानी विदेश राज्‍य मंत्री हिना रब्बानी खार ने गुरुवार को चीन से रिश्‍ते की अहमियत दोहराते हुए कहा कि पाकिस्‍तान की विदेश नीति तय करने में चीन से अच्‍छे रिश्‍ते बनाने को पूरी अहमियत दी जा रही है। चीन की सत्‍ताधारी पार्टी के एक बड़े अधिकारी से बातचीत में उन्‍होंने कहा कि पाकिस्तान और चीन पहले से काफी अच्छे दोस्त रहे हैं और इस दोस्ती को और मजबूत करना चाहते हैं।

पाकिस्तान के ज्वाइंट चीफ ऑफ स्‍टाफ कमेटी जनरल खालिद शमीम वेन बता चुके हैं कि चीन और पाकिस्तान के बीच राजनयिक संबंध स्‍थापित होने की 60वीं सालगिरह मनाने के लिए अगले महीने दोनों देशों की सेना मिल कर अभ्‍यास करेगी। यह साझा सेना थल सेना और वायु सेना अलग-अलग करेगी।

चीन की तैयारियों को भारत के पूर्व रक्षा मंत्री और समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह गंभीरता से ले रहे हैं। वह पिछले कुछ महीनों में कई बार चीन से भारत पर हमले का खतरा जता चुके हैं। उन्‍होंने बीते मंगलवार को भी कहा कि चीन की ओर से भारत पर हमले की पूरी तैयारी है। उन्‍होंने यह भी दावा किया कि भारत सरकार इसकी जानकारी रखने के बावजूद कोई जवाबी तैयारी नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि सेना को इस खतरनाक स्थिति से निपटने के बारे में कोई दिशा निर्देश नहीं दिया जा रहा है।

मुलायम का यहां तक दावा है कि भारत पर हमले की तैयारी में चीन तिब्बत के समीप भारतीय सीमाओं के पास अपने टैंक आदि की तैनाती भी कर चुका है। चीन की रणनीति के बारे में उन्होंने यह दावा भी किया कि पहले वह नेपाल पर हमला कर उसे कब्जे में लेगा और उसके बाद भारत पर हमला बोलेगा। मुलायम ने पिछले साल नवंबर में भी ऐसी ही बात कही थी।

1962 में भारत पर अचानक हमला करने वाले चीन के साथ वर्षों से भारत का सीमा विवाद चल रहा है। विदेश राज्‍य मंत्री परिणीत कौर ने लोकसभा में बताया कि भारत का 38,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र अवैध रूप से चीन के और 5,180 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पाकिस्तान के कब्जे में है। उन्‍होंने कहा कि चीन न केवल भारत के साथ अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमा को, बल्कि जम्मू-कश्मीर को भी विवादित क्षेत्र मानता है। उसने 38,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर गैरकानूनी कब्जा तो किया ही हुआ है, पाकिस्तान के साथ 1963 के अपने सीमा करार के तहत कश्मीर में 5,180 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पाकिस्तान को भी सौंप दिया है।

वर्ष 2003 में भारत व चीन विवाद सुलझाने के लिए एक-एक प्रतिनिधि नियुक्त करने पर सहमत हुए थे। अब तक इनकी 14बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। पिछली बैठक नवम्बर 2010 में आयोजित की गई थी। लेकिन इससे कोई रास्‍ता निकलता नहीं लग रहा है।

Posted on Feb 24th, 2011
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Posted in :  विदेश     
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