अमीरों की जमा पर ज्यादा ब्याज, आम लोगों को कम

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महंगाई के दौर में आम लोगों को राहत देने की बात तो दूर, उल्टे कई बैंक ब्याज दरों में भेदभाव के जरिए उन्हें आहत कर रहे हैं। ये बैंक आम निवेशकों की छोटी जमाओं पर कम ब्याज दे रहे हैं, जबकि खास लोगों को बड़ी राशि के फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) पर ज्यादा ब्याज।

इनमें भी अधिकतर सरकारी बैंक हैं। कुछ बैंक तो 10 करोड़ रुपये या इससे मोटा पैसा जमा करने वाले ग्राहकों और कंपनियों को दोगुना ब्याज देने की पेशकश कर रहे हैं। कुछ ऐसा ही हाल कर्ज की ब्याज दरों के मामले में भी है। ये बैंक अमीरों को सस्ता कर्ज देकर निहाल कर रहे हैं, वहीं आम जन महंगे होते लोन से बेहाल है।

बैंकों के बारे में जानकारी देने वाले पोर्टल बैंकिंग ओनली डॉटकॉम की रिपोर्ट ने यह भेदभाव सबके सामने ला दिया है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक सार्वजनिक क्षेत्र का इंडियन ओवरसीज बैंक (आइओबी) 10 करोड़ रुपये से कम राशि की 61 से 90 दिन वाली एफडी पर महज 4 फीसदी ब्याज दे रहा है, वहीं इससे बड़ी रकम की एफडी पर सीधे 9 फीसदी ब्याज की पेशकश कर रहा है।

बैंक ऑफ इंडिया (बीओआइ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस स्थिति में कंपनियां व चंद बड़े निवेशक अनाप-शनाप लाभ कमा सकते हैं। अमीरों और कंपनियों को सस्ते कर्ज की नीति का अनुचित फायदा भी ये उठा रहे हैं। कुछ बैंकों में आधार दर (बेस रेट) 8.25 फीसदी के आसपास है। ऐसे में कुछ कंपनियां या बड़े निवेशक वहां से मोटा कर्ज लेकर अधिक ब्याज देने वाले बैंक में जमा कर सकते हैं।

रिजर्व बैंक ने अमीरों और आम लोगों के लिए कर्ज की ब्याज दरों में अंतर को कम करने के लिए ही आधार दर की लगाम लगाई थी। बीते साल जुलाई से लागू नई व्यवस्था में कोई भी बैंक बेस रेट से कम दर पर किसी को भी लोन नहीं दे सकता। पहले इसके लिए ऐसी कोई सीमा नहीं थी और इसका फायदा कॉरपोरेट जगत को मिलता था।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस समस्या से निपटने के लिए कर्ज पर लिए जाने वाले ब्याज की तरह एफडी पर देय ब्याज दर के मामले में भी नियम बनाए जाने चाहिए।

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया भी 61 से 90 दिन की मियादी जमा यानी एफडी पर आम लोगों को 5.75 फीसदी और मोटी जमा वालों को सीधे 9.10 फीसदी ब्याज दे रहा है।

पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के मामले में यह दर क्रमश: 5.50 और 9 फीसदी है। इस समय देश के दिग्गज बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) की आधार दर (14 फरवरी, 2011 के अनुसार) 8.25 फीसदी है। वहीं कॉरपोरेशन बैंक और एचडीएफसी में यह क्रमश: 8.9 और 7.75 फीसदी है।

पोर्टल के एमडी अमित कुमार ने बताया कि केंद्रीय बैंक के नियमों के तहत कुछ साल पहले तक कम जमा राशि वाले छोटे ग्राहकों को ज्यादा ब्याज दिया जाता था, वहीं मोटी रकम की एफडी पर कम ब्याज का प्रावधान था। लेकिन अब स्थिति इसके ठीक उल्टी है। एक बैंक अधिकारी के मुताबिक वित्तीय व्यवस्था में बड़ी धनराशि हमेशा जोखिमपूर्ण होती है और इसे हॉट मनी माना जाता है। लेकिन इन दिनों बैंक इसी हॉट मनी पर निर्भर हैं।

Posted on Feb 24th, 2011
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Posted in :  व्यापार     
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