अफजल को फांसी न देने पर बरसे जज

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संसद पर हमले के केस में अफजल गुरु को फांसी की सजा सुनाने वाले दिल्ली हाई कोर्ट के  जस्टिस शिव नारायण ढींगरा मंगलवार को रिटायर हो गए। स्पेशल कोर्ट के जज के रूप में  हमले के एक साल के भीतर ही जस्टिस ढींगरा ने इस मामले में फैसला सुनाकर एक  मिशाल पेश की थी।

स्पेशल कोर्ट में दिसंबर 2002 में ही अफ़ज़ल को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद  भी उसपर कार्रवाई न होने से जस्टिस ढींगरा सरकार से खासे नाराज हैं। उन्होंने  कहा कि सुप्रीम कोर्ट से भी अफजल की सजा की पुष्टि होने के बाद भी सरकार का उसे  फांसी पर न लटकाना समझ से परे है।

सुप्रीम कोर्ट ने सन् 2006 में ही फांसी की सजा के खिलाफ अफजल  की याचिका ठुकरा दी थी।

अपने विदाई कार्यक्रम में हिंदी में दिए भाषण में जस्टिस ढींगरा ने केंद्र सरकार  की कार्यप्रणाली पर जमकर सवाल उठाए। उन्होंने एक अग्रेंजी अखबार से बातचीत में  कहा कि सरकार लाखों केस पेंडिंग होने के लिए न्यायपालिका को कोसती है लेकिन खुद सरकार कुछ दया याचिकाओं को सालों से दबाए बैठी है।

अपने 22 साल के शानदार करियर के अंतिम दिन जस्टिस ढींगरा ने कहा,’पीड़ित को कम से कम समय में न्याय दिलाने के लिए बहुत कुछ किया जाना बाकी है। न्याय मिलने में दो जीवन नहीं लगना चाहिए। मैं इस दावे से सहमत नहीं हूं कि हमारी न्याय व्यवस्था दुनिया में सर्वश्रेष्ठ है।’

Posted on Mar 2nd, 2011
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Posted in :  न्याय और प्रशाशन     
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