महंगे होंगे यूलिप प्लान

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साल 2011-12 के लिए आम बजट में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने जीवन बीमा उत्पादों पर सेवा कर बढ़ाने का प्रस्ताव किया है। बजट प्रस्तावों पर संसद की मुहर लगने पर परंपरागत जीवन बीमा योजनाएं और यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान यानी यूलिप महंगे हो जाएंगे। इंश्योरेंस इंडस्ट्री को लागत में 0.50-0.75 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान है। कंपनियों ने सेवा कर के चलते लागत बढ़ने के असर का आकलन नहीं किया है, लेकिन ज्यादातर इंश्योरेंस एग्जिक्यूटिव का कहना है कि प्रीमियम 0.75 फीसदी तक बढ़ सकता है।

लाइफ इंश्योरेंस काउंसिल के महासचिव एस बी माथुर ने कहा, ‘सर्विस टैक्स में बढ़ोतरी के साथ तमाम पॉलिसी महंगी हो जाएंगी। परंपरागत बीमा योजनाएं जहां 0.50 फीसदी तक महंगी होंगी, वहीं यूलिप के दाम 0.75 फीसदी तक बढ़ सकते हैं।’

बजट 2011-12 में परंपरागत योजनाओं पर सर्विस टैक्स 50 फीसदी बढ़ाने का प्रस्ताव है। ऐसी योजनाओं में जमा प्रीमियम का निवेश नियामक के दिशानिर्देशों के हिसाब से किया जाता है। इस समय परंपरागत एंडोमेंट या मनी बैक प्लान पर कुल प्रीमियम भुगतान पर पॉलिसीधारक को एक फीसदी सर्विस टैक्स चुकाना होता है। यूलिप में पॉलिसीहोल्डर इक्विटी और डेट विकल्पों में से खुद अपना निवेश पोर्टफोलियो चुनता है।

यूलिप के मामले में अब सविर्स टैक्स प्रीमियम एलोकेशन और एडमिनिस्ट्रेशन चाजेर्ज को छोड़ बाकी प्रीमियम पर लगेगा। फिलहाल टैक्स सिर्फ मॉर्टलिटी और फंड मैनेजमेंट चार्ज पर लगता है।भारती एक्सा लाइफ इंश्योरेंस के सीएफओ जी श्रीनिवासन ने कहा, ‘एलोकेशन चार्जेज और पॉलिसी एडमिनिशट्रेशन पर टैक्स लगने से कमाई पर असर होगा और हमें लगता है कि पॉलिसीधारक की आमदनी 20-25 बेसिस पॉइंट्स कम हो सकती है।’

एक लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के एक सीनियर एग्जिक्यूटिव ने कहा कि शुल्कों की सीमा तय कर पॉलिसीधारकों की आमदनी बढ़ाने का इरडा का फैसला टैक्स बढ़ने से निरर्थक हो जाएगा। हालांकि, बीमा कंपनियां इस बात पर स्पष्ट राय नहीं बना सकी हैं कि सर्विस टैक्स कुल चार्ज की 3 फीसदी की सीमा के भीतर होगा या नहीं। पिछले साल, बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) ने सरेंडर चार्ज और फंड मैनेजमेंट चार्ज के साथ सभी तरह के शुल्कों की अधिकतम सीमा तय कर दी थी। 10 साल से छोटी अवधि की पॉलिसी के लिए ग्रॉस और नेट यील्ड का अंतर 3 फीसदी और 10 साल से ज्यादा मैच्योरिटी पीरियड वाली पॉलिसी के लिए 2.25 फीसदी तय किया जा चुका है।

इंडिया फर्स्ट लाइफ इंश्योरेंस के एमडी पी नंदगोपाल ने कहा कि इस बारे में स्पष्टता नहीं है कि सर्विस टैक्स यूलिप पर लगने वाले शुल्कों के ही दायरे में होंगे या नहीं। उन्होंने कहा, ‘अगर यह 3 फीसदी की सीमा से बाहर हुआ, तो पॉलिसीधारकों के लिए प्रीमियम बढ़ जाएगा। अगर यह तय सीमा के भीतर रहा, तो बीमा कंपनियों को अपने खर्चों का सही प्रबंधन करना होगा।’

आईडीबीआई फेडरल लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ जी वी नागेश्वर राव ने कहा, ‘सर्विस टैक्स बढ़ने से पॉलिसीधारकों के लिए इंश्योरेंस महंगा हो जाएगा।’

Posted on Mar 2nd, 2011
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Posted in :  व्यापार     
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