हंगामे के बीच संसद में पूरी हुई जेपीसी गठन प्रक्रिया

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2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले की जांच के लिए 30 सदस्यीय  संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के गठन की प्रक्रिया मंगलवार  को पूरी हो गई।



नई दिल्ली. 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले की जांच के लिए 30 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के गठन की प्रक्रिया मंगलवार को पूरी हो गई।

राज्यसभा द्वारा समिति के लिए 10 सदस्यों के नाम के प्रस्ताव को मंजूरी दे गई। पिछले सप्ताह लोकसभा ने जेपीसी के लिए 20 नामों के प्रस्ताव को पारित किया था। अब लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार इन 30 सदस्यों में से एक को अध्यक्ष मनोनीत करेंगी।

विपक्ष के हंगामे के कारण हालांकि दोनों सदनों में प्रश्नकाल नहीं हो सका। विपक्षी दलों के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही दो बार और राज्यसभा की कार्यवाही एक बार स्थगित हुई।

मध्य प्रदेश में किसानों की हालत, वर्ष 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों, जाति आधारित जनगणना और फोन टैपिंग के मामले को लेकर विपक्षी सदस्यों ने दोनों सदनों में जमकर हंगामा किया।

राज्यसभा में दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने जेपीसी के गठन का प्रस्ताव पेश किया। यह समिति 1998 में तत्कालीन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार द्वारा बनाई गई 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन नीति की जांच भी करेगी।

सिब्बल ने अपने पूर्ववर्ती ए.राजा का यह कहते हुए बचाव भी किया कई देशों ने विभिन्न स्पेक्ट्रम आवंटन नीति अपनाई, लेकिन किसी भी मंत्री को अभी तक जेल नहीं जाना पड़ा है।

ज्ञात हो कि राजा ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा अपने खिलाफ दायर किए गए मामले के बाद इस्तीफा दे दिया था। इस समय वह जेल में हैं।

जेपीसी के लिए राज्यसभा के नामित सदस्यों में कांग्रेस से पी.जे. कुरियन, जयंती नटराजन और प्रवीण राष्ट्रपाल, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से एस.एस. अहलूवालिया एवं रवि शंकर प्रसाद तथा राजा की पार्टी डीएमके से तिरुचि शिवा शामिल हैं।

इससे पहले कांग्रेस सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी समिति से अपना नाम वापस ले चुके हैं। उन्होंने कहा है कि वह सेलुलर आपरेटरों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के तौर पर अदालत में पेश हो चुके हैं।

समिति में उच्च सदन से नामित अन्य सदस्यों में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) से योगेंद्र पी. त्रिवेदी, जनता दल (युनाइटेड) से रामचंद्र प्रसाद सिंह, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से सतीश चंद्र मिश्रा तथा मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) से सीताराम येचुरी शामिल हैं।

जेपीसी के लिए लोकसभा से नामित सदस्यों में कांग्रेस के आठ सदस्य होंगे। इनमें पी.सी. चाको, मनीष तिवारी, जय प्रकाश अग्रवाल, अधीर रंजन चौधरी, वी. किशोर चंद्र देव, दीपेंद्र सिंह हुड्डा, निर्मल खत्री और प्रबण सिंह घाटोवर शामिल हैं।

समिति में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लोकसभा सदस्य जसवंत सिंह, यशवंत सिन्हा, हरीन पाठक और गोपीनाथ मुंडे शामिल हैं।

समिति में अन्य सदस्यों में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के टी.आर. बालू, तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी, जनता दल (युनाइटेड) के शरद यादव, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के दारा सिंह चौहान, समाजवादी पार्टी (सपा) के अखिलेश यादव, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के गुरुदास दासगुप्ता, बीजू जनता दल (बीजद) के अर्जुन चरण सेठी और ऑल इंडिया अन्ना द्रमुक मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के एम.थम्बी दुरई शामिल हैं।

इस तरह जेपीसी में कांग्रेस के 11, भाजपा के आठ सांसद होंगे। यह समिति संसद में अपनी रिपोर्ट इसी वर्ष मानसून सत्र के अंत में पेश करेगी। इससे पहले मंगलवार को संसद के दोनों सदनों में प्रश्नकाल नहीं हो सका।

हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही पहली बार 11.15 बजे तक फिर दोपहर 12 बजे और उसके बाद दो बजे तक स्थगित हुई। उधर राज्यसभा 12 बजे तक स्थगित हुई। इसके बाद सदन में काकाज सामान्य रूप से चला।

लोकसभा में जाति आधारित जनगणना के मुद्दे पर भी हंगामा हुआ। सदस्यों ने कहा कि सरकार यह बताए कि जाति के आधार पर कब और कैसे जनगणना कराई जाएगी। सदन की कार्यवाही 12 बजे जैसे ही शुरू हुई गृहमंत्री पी. चिदम्बरम ने जाति आधारित जनगणना के मुद्दे पर सरकार का रुख स्पष्ट किया।

चिदम्बरम ने कहा, “जाति आधारित जनगणना जून में आरम्भ होगी और सितम्बर में समाप्त हो जाएगी। यदि कोई भी सदस्य अपनी सलाह देना चाहता है तो उस पर विचार किया जाएगा।”

उधर, राज्यसभा भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टी अकाली दल के सदस्यों ने रेवाड़ी में हुए सिखों की हत्या के मामले को उठाने की अनुमति मांगी, जिस पर सभापति हामिद अंसारी ने सदस्यों से कहा कि वह इस मामले में पहले नोटिस दें। उन्होंने सदस्यों से इस मुद्दे को शून्यकाल के दौरान उठाने की बात कही।

Posted on Mar 2nd, 2011
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Posted in :  बड़ी खबर     
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