वायदा कारोबार रोके बिना महंगाई पर लगाम नहीं : मोदी

Font Size : अ- | अ+ comment-imageComment print-imagePrint

महंगाई रोकनी है तो जरूरी चीजों के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध लगाएं और कीमतों को स्थिर रखने के लिए  राष्ट्रीय स्तर पर एक कोष स्थापित करें। बेकाबू महंगाई थामने के लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित गुजरात के  मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाले मुख्यमंत्रियों के कार्यदल ने केंद्र सरकार से बिना किसी लाग-लपेट के  ऐसी ही 20 सिफारिशें की हैं। बुधवार को प्रधानमंत्री को सौंपी गई रिपोर्ट में भारतीय खाद्य निगम  की कार्यप्रणाली को तीन भागों में बांटने समेत 64 अहम मसलों पर केंद्र सरकार से कार्रवाई को कहा है।

महंगाई से निपटने के उपाय खोजने के लिए उपभोक्ता मामलों पर केंद्रित कार्य दल ने एक साल से भी कम  समय में अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंप दी हैं। इस कार्यदल का गठन आठ अप्रैल 2010 को हुआ था। कार्य दल के मुखिया गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से बुधवार शाम प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात कर उन्हें इस बारे में अपनी रिपोर्ट सौंपी। इस कार्य दल में मोदी के साथ महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश व तमिलनाडु के मुख्यमंत्री भी शामिल थे।

रिपोर्ट में सबसे महत्वपूर्ण सिफारिश आवश्यक वस्तुओं के वायदा कारोबार पर तत्काल रोक लगाना है। विपक्ष की तरफ से इस पर रोक लगाने की लगातार मांग की जाती रही है, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे ज्यादा तवज्जो नहीं दी। यहां तक कि दो दिन पहले पेश हुए केंद्रीय आम बजट में भी इस बारे में कोई पहल नहीं की गई है। कार्यदल में भाजपा के साथ कांग्रेस व संप्रग से जुड़े मुख्यमंत्री भी शामिल थे, इसलिए इसकी रिपोर्ट महत्वपूर्ण है। केंद्र के लिए भी इसको ठंडे बस्ते में डालना आसान नहीं होगा। कीमतों को थामने के लिए एक राष्ट्रीय कोष बनाने का सुझाव भी महत्वपूर्ण है। इसके अलावा नीति निर्धारण के लिए केंद्र व राज्य दोनों जगहों पर मंत्री स्तरीय समन्वय व्यवस्था करने को भी कहा गया है।

कार्यदल ने भारतीय खाद्य निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। उसने इसके संचालन को तीन भागों खरीद, भंडारण व वितरण में विभाजित करने को कहा है। देश भर में मंडियों के हालात को गंभीरता से लेते हुए कार्यदल ने मंडी कानूनों में तेजी से व्यापक सुधार करने को कहा है। मंडियों को बुनियादी सुविधाएं देने व इस क्षेत्र में उदारीकरण पर भी जोर दिया गया है। कार्यदल ने कृषि विपणन ढांचे को समयबद्ध कार्यक्रम के तहत मजबूत करते हुए खाद्यान्न की कमी वाले क्षेत्रों में भंडारण क्षमता बढ़ाने, शीत गृह बनाने व कृषि प्रसंस्करण पर खासा जोर दिया है। संगठित व सहकारी क्षेत्र के जरिए खुदरा बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की सिफारिश भी गई है।

Posted on Mar 2nd, 2011
SocialTwist Tell-a-Friend
Posted in :  व्यापार     
Subscribe by Email

Leave a comment

Type Comments in Indian languages (Press Ctrl+g to toggle between English and Hindi OR just Click on the letter)


विदेश

राज्य

महिला

अपराध

ब्यूटी