सुप्रीम कोर्ट के बेआबरू करने के बाद थॉमस ने इस्तीफा दिया

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नई दिल्ली।। पामोलीन तेल आयात घोटाले के आरोपी पीजे थॉंमस को चीफ विजिलेंस  कमिश्नर ( सीवीसी ) के रूप में नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है। इसके बाद पीजे  थॉमस ने सरकार को अपना इस्तीफा भेज दिया। हालांकि थॉमस के वकील ने इससे  इनकार किया है।

इससे पहले चीफ जस्टिस एस . एच . कपाड़िया , जस्टिस के . एस . राधाकृष्णन और  जस्टिस स्वतंत्र कुमार की बेंच ने थॉमस को सीवीसी बनाए जाने को गैरकानूनी करार  दिया और कहा कि इस पद की गरिमा बनाए रखने के लिए उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए।

पिछले कुछ महीनों से थॉमस मामले पर किरकिरी झेल रही केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा झटका दिया। सीवीसी पद पर थॉमस की नियुक्ति के खिलाफ दायर याचिका पर फैसला देते हुए बेंच ने कहा कि उनकी नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री और गृहमंत्री वाली हाई लेवल कमिटी ने जो सिफारिश की, वह कानून के अनुरूप नहीं है। कोर्ट ने कहा कि कारण चाहे जो भी हो कमिटी थॉमस के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करने वाली सामग्री पर विचार करने में असफल रही। बेंच ने कहा, ‘ कमिटी और सरकार ने सीवीसी के लिए थॉमस का नाम सुझाने के वक्त इस संस्था की गरिमा का ध्यान नहीं रखा। ‘

कोर्ट ने सरकार के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि 2008 में सीवीसी की नियुक्ति के लिए सतर्कता विभाग ने जो मंजूरी दी थी, उसी को पद पर नियुक्ति के लिए बनी उम्मीदवार सूची में थॉमस के नाम को शामिल करने का आधार बनाया गया। कोर्ट ने कहा कि थॉमस के नाम की सिफारिश करते हुए न तो समिति और न ही सरकार के किसी अधिकारी ने सीवीसी कार्यालय की संस्थागत ईमानदारी के व्यापक मुद्दे पर ध्यान दिया।

सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, सीवीसी की नियुक्ति की कसौटी न केवल संस्थागत ईमानदारी है, बल्कि प्रत्याशी की व्यक्तिगत ईमानदारी भी है। कोर्ट के मुताबिक, भविष्य में कोई भी नियुक्ति केवल नौकरशाहों के लिए सीमित नहीं रहनी चाहिए, इसमें दूसरे क्षेत्रों से जुड़े बेदाग निष्ठा वाले लोगों के नामों पर भी विचार किया जाना चाहिए। कोर्ट ने थॉमस और सरकार के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि सीवीसी की नियुक्ति को न्यायिक समीक्षा के तहत नहीं लाया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि अनुशंसाओं की वैधानिकता को न्यायिक समीक्षा के तहत लाया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले इस मामले में 10 फरवरी को फैसला सुरक्षित कर लिया था। जनहित याचिका दायर करने वाले एनजीओ का कहना था कि थॉमस के खिलाफ क्रिमिनल केस पेंडिंग है , बावजूद इनकी नियुक्ति सीवीसी के तौर पर की गई।

थॉमस को पिछले साल 7 सितंबर को सीवीसी के तौर पर नियुक्त किया गया था। इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा था कि करप्शन का केस पेंडिंग रहते सीवीसी के पद पर थॉमस की नियुक्ति नहीं हो सकती।

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि थॉमस को सत्य निष्ठा वाला व्यक्ति नहीं माना जा सकता , क्योंकि उनके खिलाफ पामोलीन तेल आयात घोटाले में आरोप पत्र तब दायर हुआ , जब वह केरल के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्रालय में सचिव थे। उन्हें स्थानीय अदालत से जमानत मिली थी।

Posted on Mar 3rd, 2011
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