कॉमनवेल्थ घोटालाः स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी देश को लूटा

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नई दिल्ली. कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों के दौरान सिर्फ आयोजन समिति ही नहीं, केंद्रीय  स्वास्थ्य मंत्रालय में भी जमकर लूट चली। जरूरत न होने के बावजूद गेम्स से पहले सफदरजंग  अस्पताल परिसर में 70 करोड़ की लागत से आलीशान स्पोर्ट्स इंज्युरी सेंटर बना दिया गया।

इसके उपकरण 200 से 6000 फीसदी ज्यादा कीमत पर खरीदे गए। जबकि कॉमनवेल्थ गेम्स आयोजन समिति ने स्वास्थ्य मंत्रालय से किसी नए अस्पताल या विभाग की जरूरत बताई ही नहीं थी।भास्कर के अनुसार  पड़ताल में पता चला है कि सेंटर निर्माण और उपकरण की खरीदी में तमाम नियमों को ताक पर रख दिया गया। भारी अनियमितता को भांपकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसकी जांच शुरू कर दी है।

सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारियों से पता चला है कि इस सात मंजिला सेंटर में बने मोड्यूलर ऑपरेशन थिएटर और मेडिकल गैस मैनेजमेंट सिस्टम के लिए सिर्फ एक ही कंपनी (एमडीडी मेडिकल सिस्टम प्रा. लि) का चुनाव किया गया।

http://www.mdd.co.in/

कस्टम विभाग से मिले दस्तावेजों और लेडी हार्डिग मेडिकल कॉलेज में खरीदे गए इन्हीं उपकरणों के दामों के मिलान से पता चला है कि ये उपकरण मात्र 4.79 करोड़ में खरीदे जा सकते हैं। जबकि कंपनी ने सरकार से 16.11 करोड़ रुपए वसूले। सभी 77 उपकरणों के मामले में ऐसा हुआ।कुछ नमूने : -नए अस्पताल की छत पर लगाई एल्युमीनियम छड़ों (40 सेट) की 6000 फीसदी कीमत। (बाजार कीमत 589 रुपए, अदा किए 35000 रुपए) -ऑपरेशन थिएटर के बाहर लगे 400 मीटर हैंड रेल क्रैश गार्ड प्रोटेक्शन सिस्टम के लिए 4300 प्रतिशत ज्यादा पैसा वसूला। (बाजार कीमत 345 रुपए, अदा किए 15000 रुपए) -कॉर्नर गार्ड प्रोटेक्शन सिस्टम के लिए 4300 फीसदी ज्यादा पैसा। (बाजार कीमत 230.59 रुपए, अदा किए 10000 रुपए)किसने क्या कहा: उपकरण सप्लायर कंपनी के निदेशक राजन वर्मा ने कहा ‘कंपनी ने टेंडर में सबसे कम बोली लगा कर उपकरणों की सप्लाई की है। सरकार से ली गई रकम बाजार कीमत के अनुरूप ही है।

’तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव सुजाता राव ने बताया कि इंज्युरी सेंटर में लगे उपकरणों की खरीद का फैसला किसी एक अधिकारी की अनुमति से नहीं हुआ था। कॉमनवेल्थ गेम्स के शुरू होते ही मेरे पद छोड़ने का वक्त आ चुका था। सेंटर में किसी अनियमितता की शिकायत की बात मेरे ध्यान नहीं है।’स्पोर्ट्स इंज्युरी सेंटर परियोजना की देखरेख कर रहे स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव विनित चौधरी और निदेशक डा. दीपक चौधरी से बात करने की कोशिश की गई। दोनों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

सेंटर के निर्माण पर ही सवाल:

एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा कॉमनवेल्थ खेलों के लिए स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर का निर्माण ही सवाल के घेरे में हैं। आयोजन समिति ने कॉमनवेल्थ खेलों के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय को सिर्फ अपनी तैयारियों के बारे में एक औपचारिक पत्र भर लिखा था। खेलों के लिए अलग से कोई अस्पताल या सेंटर खोलने की बात नहीं की थी। स्वास्थ्य मंत्रालय के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी ओर से अस्वाभाविक सक्रियता दिखाते हुए इंज्युरी सेंटर खोलने का निर्णय लिया।

नियमों की अनदेखी:

सूत्रों के अनुसार सौदे में कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया गया। मसलन, जनरल फाइनेंस रूल के मुताबिक स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से किसी भी खरीद के लिए इंटेग्रेटेड प्रोक्योरमेंट मीटिंग में डीजीएचएस के साथ ही संयुक्त सचिव (प्रोक्योरमेंट) का होना आवश्यक है। उपकरणों के खरीद का फैसला संयुक्त सचिव की अनुपस्थिति में ही किया गया।उपकरणों की खरीद का खर्च कम दिखाने की भी कोशिश की गई। मसलन, इंज्युरी सेंटर के ऑपरेशन थिएटर में लगे उपकरणों के लिए पांच साल के रख-रखाव का खर्च जोड़कर 14.69 करोड़ बताए गए हैं।

दस्तावेजों में उपकरणों का जीवन 10 साल आंका गया है। कंपनी ने अपने टेंडर में साफ लिखा है कि कांट्रैक्ट खत्म होने के बाद अगले पांच साल के रख-रखाव के लिए वह 8 करोड़ रुपए वसूलेगा। इस हिसाब से इस खरीद की कुल कीमत 22 करोड़ रुपए से ऊपर पहुंच जाएगी।

गोलबंदी कर एक कंपनी को ऊंचे दाम पर दिलाए ठेके

इंज्युरी सेंटर में लगने वाले उपकरणों के ऊंचे दाम वसूलने के लिए कंपनियों ने गोलबंदी (कार्टलाइजेशन) किया था। स्वास्थ्य मंत्रालय से मिले दस्तावेजों से पता चला है कि टेंडर के योग्य पाई गई तीन कंपनियों ने अपने टेंडर में एक ही तरह की कई गलतियां की। स्वास्थ्य मंत्रालय इस गोलबंदी की भी जांच कर रहा है।

मंत्रालय ने मोड्यूलर ऑपरेशन थिएटर (एमओटी) और मेडिकल गैस मैनेजमेंट सिस्टम (एमजीएमएस) खरीदने के लिए महिपालपुर स्थित एमडीडी मेडिकल सिस्टम प्रा. लि, पंजाबी बाग स्थित पीईएस इंस्टालेशन प्रा. लि और रामा रोड स्थित मेडिकल प्रोडक्ट्स सर्विसेस को काबिल पाया था। इन तीनों कंपनियों ने सभी 77 उपकरणों के दाम ज्यादा बताए।फाउंडेशन फॉर कॉमन कॉज एंड पीपल अवेयरनेस नामक एनजीओ ने इस गोलबंदी का पर्दाफाश करते हुए स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद को पत्र भी लिखा है। संस्था ने पिछले नवंबर से स्वास्थ्य मंत्रालय को कई पत्र लिखे, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।भास्कर के पास इन तीनों कंपनियों के टेंडर की प्रति मौजूद है।

सूत्रों के अनुसार तीनों कंपनियों के टेंडर में इतनी ज्यादा समानता है कि गोलबंदी साफ दिखती है। मसलन, अस्पताल निर्माण करने वाली सरकारी उपक्रम एचएससीसी लि. ने टेंडर फार्म में प्राइस शेडच्यूल के सेक्शन 3xi यानी 11 का जिक्र किया है।सरकार द्वारा चयनित कंपनी एमडीडी मेडिकल सिस्टम ने गलती से प्राइस शेडच्यूल के सेक्शन 3xi की बजाय ix3 लिखा। अन्य दो कंपनियों ने भी अपने टेंडरों में यही गलती दोहराई है। इसी तरह प्राइस शेडच्यूल में सरकारी उपक्रम ने सेक्शन ए और डी का जिक्र किया है। एमडीडी मेडिकल सिस्टम ने सेक्शन डी की बजाए बी लिख दिया है। अन्य दो कंपनियों ने यही गलती दोहराई है।

Posted on Mar 3rd, 2011
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