पीएम देंगे इस्‍तीफा? थॉमस की नियुक्ति अवैध: सुप्रीम कोर्ट

Font Size : अ- | अ+ comment-imageComment print-imagePrint

भ्रष्‍टाचार के आरोपों के बाद विवादों में रहे केंद्रीय  सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) पी जे थॉमस की नियुक्ति को सुप्रीम  कोर्ट ने गैरकानूनी ठहराया है। कोर्ट ने आज इस मामले  की सुनवाई करते हुए टिप्‍पणी की कि थॉमस को तत्‍काल  सीवीसी का पद छोड़ देना चाहिए।

सीवीसी के पद पर थॉमस की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह निर्णय सुनाया।

शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद थॉमस ने इस्‍तीफा दे दिया, लेकिन विपक्ष ने इसे नाकाफी बताया है। विपक्ष का सीधा सवाल है कि क्‍रूा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह नैतिक आधार पर इस्‍तीफा देने जा रहे हैं? हालांकि कांग्रेस ने यह कह कर इसका जवाब दे दिया है कि सीवीसी की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री की जिम्‍मेदारी नहीं बनती है।

आज से पहले थॉमस लगातार पद छोड़ने से इनकार करते रहे थे। उन्‍होंने दलील दी थी कि जब दागी नेता सांसद बने रह सकते हैं, तो वह क्‍यों नहीं? लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उनके पास कोई चारा नहीं रह गया है। लेकिन आज सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की ओर से 3 सितंबर 2010 को की गई थॉमस की नियुक्ति को दरकिनार करते हुए भविष्‍य में सीवीसी के पद पर होने वाली नियुक्ति के लिए कड़े मानक भी तय कर दिए। कोर्ट ने कहा कि सीवीसी को नियुक्‍त करने वाली कमेटी की सिफारिश का कानून में कोई वजूद ही नहीं है। अदालत ने सवालिया लहजे में कहा कि आखिर थॉमस के खिलाफ आरोपों पर इस कमेटी ने गौर क्‍यों नहीं किया?

सीवीसी का काम भ्रष्‍टाचार पर नजर रखना और उसे रोकना है, लेकिन सरकार ने यह जिम्‍मेदारी भ्रष्‍टाचार के एक आरोपी व्‍यक्ति को ही सौंप दी। इसी आधार पर थॉमस की नियुक्ति का विरोध हुआ। पर सरकार यह कह कर उन्‍हें बचाती रही कि उसे थॉमस पर लगे आरोपों की जानकारी नहीं थी।

पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने पॉमोलीन घोटाले में थॉमस के खिलाफ मुकदमा चलाने पर लगाई गई रोक हटा ली थी। इसके बाद उनके इस्‍तीफे की मांग और तेज हुई थी, लेकिन उन्‍होंने पद छोड़ने से इनकार कर दिया था।

1991 में केरल में हुए पॉमोलीन घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री के करुणाकरन और पीजे थॉमस समेत नौ लोगों पर मुकदमा चल रहा था। लेकिन 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी। पॉमोलीन घोटाले के दौरान पी जे थॉमस केरल के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग सचिव थे।

चीफ जस्टिस एसएच कपाडिय़ा, जस्टिस केएस राधाकृष्णन और स्वतंत्र कुमार ने गत 10 फरवरी को फैसला बाद में सुनाने की घोषणा की थी। थॉमस पिछले साल 7 सितंबर को सीवीसी पद पर नियुक्त हुए थे। उनके खिलाफ केरल में भ्रष्टाचार का मामला चल रहा है। एनजीओ सेंटर फॉर पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन और कुछ अन्य ने थॉमस की सीवीसी पद पर नियुक्ति को चुनौती देते हुए याचिकाएं दायर की हैं। याचिकाओं में केरल में पॉमोलीन ऑयल घोटाले के मामले को भी आधार बनाया गया था। इसके अलावा यह भी कहा गया कि वे दूरसंचार सचिव रह चुके हैं। आरोप है कि उन्होंने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले को भी दबाने की कोशिश की।

बिना जरूरी अनुभव के थॉमस को बना दिया था सचिव


सीवीसी पूरे देश में भ्रष्टाचार की किसी भी शिकायत की जांच कराने वाली सर्वोच्‍च एजेंसी है। इसके मुखिया पीजे थॉमस की नियुक्ति की प्रक्रिया अपने आप में कई राज खोलती है। थॉमस केरल के पामोलीन आयात घोटाले में फंसे थे। केंद्र सरकार में सचिव बनने के लिए जरूरी केंद्र में दो साल की प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) का अनुभव तक उनके पास नहीं था। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने उन्हें सचिव बनाया। उनकी नियुक्ति पर ज्यादा लोगों का ध्यान न जाए, इसलिए उन्हें कम महत्वपूर्ण माने जाने वाले संसदीय कार्य मंत्रालय में सचिव बनाया गया। फिर एक आम तबादले की तरह उन्हें हाई प्रोफाइल टेलीकॉम विभाग में सचिव की कुर्सी मिली। उनकी तरफ लोगों का ध्यान तब गया, जब प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय कमेटी ने उन्हें सीवीसी नियुक्त किया। इस कमेटी में गृहमंत्री पी.चिदंबरम ने तो प्रधानमंत्री का समर्थन किया, लेकिन लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने कड़ी आपत्ति जताई।

1973 बैच के आईएएस अधिकारी पीजे थॉमस को पॉमोलिन आयात मामले में आठवां अभियुक्त बनाया गया था। थॉमस पर आरोप लगे थे कि उन्होंने मलेशिया की एक कंपनी से 1500 टन पॉम आयल आयात करने के सौदे में भ्रष्टाचार किया। यह सौदा 1992 में उस समय किया गया था जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के. करुणाकरन केरल के मुख्यमंत्री थे। इस मामले में करुणाकरन प्रथम अभियुक्त जबकि उस समय राज्य के खाद्य मंत्री टीएच मुस्तफा दूसरे नंबर के अभियुक्त थे।

असर


इस मामले में एक याचिकाकर्ता और पूर्व मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त जेएम लिंग्‍दोह ने कहा कि आज के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर देश में किसी भी संवैधानिक संस्‍था की नियुक्ति पर पड़ेगा और इन पदों पर पाक-साफ लोगों के नियु‍क्‍त होने की संभावना मजबूत होगी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का राजनीतिक असर भी पड़ना तय है। विपक्ष सरकार को यह कहते हुए घेरेगी कि उसने एक दागी शख्‍स को किन परिस्थितियों में भ्रष्‍टाचार की निगरानी करने वाली संवैधानिक संस्‍था का अगुआ बना दिया।

विपक्ष की प्रतिक्रिया


बीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है। भाजपा नेता राजीव प्रताप रुढ़ी ने कहा कि यह फैसला प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़ा झटका है। भाजपा नेता सुषमा स्‍वराज ने ट्विटर के जरिये कहा कि कोर्ट के फैसले से सीवीसी पद की गरीमा बहाल हुई। भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि अब नैतिक आधार पर प्रधानमंत्री को जिम्‍मेदारी लेते हुए इस्‍तीफा दे देना चाहिए।

माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि सीवीसी मामले पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री जवाब दें। जनता दल अध्‍यक्ष शरद यादव ने कहा कि नैतिक आधार पर पी चिदंबरम को इस्‍तीफा देना चाहिए। सीपीआई नेता डी राजा ने कहा, सुप्रीम कोर्ट का फैसला यूपीए सरकार और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बड़ा झटका है। लेकिन कांग्रेस नेता सत्‍यव्रत चतुर्वेदी ने कहा कि यह फैसला प्रधानमंत्री के लिए झटका नहीं है।

Posted on Mar 3rd, 2011
SocialTwist Tell-a-Friend
Posted in :  बड़ी खबर     
Subscribe by Email

Leave a comment

Type Comments in Indian languages (Press Ctrl+g to toggle between English and Hindi OR just Click on the letter)


विदेश

राज्य

महिला

अपराध

ब्यूटी